धान–गेहूं फसल प्रणाली का महत्व एवं चुनौतियाँ

धान–गेहूं भारत की सबसे प्रमुख फसल प्रणालियों में से एक है, जो लगभग 10.5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में अपनाई जाती है। लेकिन वर्तमान समय में इस प्रणाली की स्थिरता कई समस्याओं के कारण खतरे में है, जैसे कि भूजल स्तर में गिरावट, पोषक तत्वों की कमी तथा मिट्टी और पर्यावरण की गुणवत्ता में गिरावट।

आज अधिकांश किसान धान की कटाई कम्बाइन हार्वेस्टर से करते हैं, जिससे खेत में बड़ी मात्रा में पराली (धान का अवशेष) बच जाती है। श्रमिकों की कमी और गेहूं की समय पर बुवाई के दबाव के कारण किसान अक्सर इस पराली को खेत में ही जला देते हैं।

पराली जलाने से निकलने वाली गर्मी मिट्टी में रहने वाले लाभकारी सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देती है। इसके साथ ही बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें जैसे कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) और मीथेन (CH₄) वातावरण में उत्सर्जित होती हैं, जिससे वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की समस्या बढ़ती है।

समाधान

लेख के अनुसार, पराली का खेत में ही प्रबंधन (In-situ Rice Residue Management) सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। यदि पराली को जलाने के बजाय मिट्टी में मिला दिया जाए, तो इससे:

  • मिट्टी में जैविक पदार्थ (Organic Matter) बढ़ता है।
  • मिट्टी के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों में सुधार होता है।
  • पोषक तत्वों और पानी के उपयोग की दक्षता बढ़ती है।
  • फसल की उत्पादकता और मिट्टी की दीर्घकालीन उर्वरता में सुधार होता है।
  • पर्यावरण प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है।

निष्कर्ष: पराली जलाने के बजाय उसका खेत में वैज्ञानिक प्रबंधन करना धान–गेहूं फसल प्रणाली को टिकाऊ (Sustainable) बनाने का सबसे अच्छा उपाय है।

Reference : 

Kumar, A., et al. (2025). Title of the articleIndian Farming75(2), February 2025. Indian Council of Agricultural Research (ICAR). ICAR ePubs 

महाराणा प्रताप का हाथी राम प्रसाद

महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के बारे में सभी जानते हैं। उनके पास राम प्रसाद नाम का एक हाथी भी था। अकबर की ओर से मुगल सेना में हिस्सा लेने वाले अल-बदायूंनी ने महाराणा प्रताप के हाथी राम प्रसाद के बारे में लिखा है कि हल्दी घाटी युद्ध के समय अकबर की सबसे बड़ी इच्छा महाराणा प्रताप व उनके राम प्रसाद नाम के हाथी को बंदी बनाने की थी। राम प्रसाद ने अकेले ही अकबर के 13 हाथियों को हल्दी घाटी युद्ध में मार गिराया था। तब सात हाथियों पर सवार अकबर के 14 महावतों ने अकबर से अनुमति लेकर राम प्रसाद को घेर कर बंदी बना लिया और अकबर के समक्ष पेश कर दिया। अकबर ने उसका नाम बदलकर पीर प्रसाद रख दिया। बंदी बना लिये जाने के बाद स्वामी भक्त राम प्रसाद ने खाना-पीना त्याग दिया। अकबर के आदेश पर उसे ढीला देने के लिए उसे गन्ने का रस दिया गया, लेकिन राम प्रसाद ने 18 दिन तक मुँह-खोलकर अन्न ग्रहण नहीं किया।


Photographs of The Basilica of Bom Jesus

The Basilica of Bom Jesus is one of the most iconic and historically significant churches in India. Located in Old Goa, this UNESCO World Heritage Site is renowned for its stunning Baroque architecture and deep spiritual importance. Built in 1605, the church is dedicated to “Bom Jesus,” meaning “Good Jesus,” and is especially famous for housing the mortal remains of St. Francis Xavier, one of the most revered missionaries in Christianity.

The church’s exterior, made of red laterite stone, gives it a timeless and rustic appearance, while the interior showcases intricate carvings, gilded altars, and beautiful artwork reflecting Portuguese influence. Visitors from across the world come here not only for religious purposes but also to admire its architectural beauty and historical value.

The Basilica of Bom Jesus stands as a symbol of Goa’s rich cultural heritage and colonial past. Its peaceful surroundings and spiritual ambiance make it a must-visit destination for travelers, photographers, and history enthusiasts alike.

Note:
All the above photos are captured using an iPhone. If anyone is interested in purchasing high-resolution images, please feel free to contact on WhatsApp at 8934978929.